Hindi poetry
Wednesday, 4 December 2013
Tuesday, 19 November 2013
Friday, 15 November 2013
अभिनन्दन
अभिनन्दन उन आजन्मे बच्चों का जो,
भारत का भविष्य निर्माण करेंगे ।
उन बच्चियों का जो रूढ़िवादिता की,
भेंट चढ़ते चढ़ते बच गई हैं ।
भाग्य विधाता देश के सह्रदय नागरिकों का ,
जो समय समय पर देश का नासूर बना भ्रष्टाचार की
नकेल कसने को हर वक्त तैयार रहते हैं ।
उन कास्तकारों और मजदूरों का जो,
नींव की ईंट बन उफ़ तक नहीं करते हैं ।
शिक्षक जो अथाह ज्ञान देते हैं,
परन्तु उसका कोई हिसाब नहीं है ।
स्रष्टि में लाने वाले उन माता पिता का ,
जिनके किसी भी कार्य की कीमत नहीं चुकाई जा सकती ।
सहकारिता का सबक सिखाने वाले भाई बहिन और दोस्तोंका,
जो ज्यादा ज्ञानवान न होकर भी बहुत कुछ देदेते हैं।
सभी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग देने वाली हस्तियों का,
जो हमें तनाव रहित रखने की कोशिश करतीं हैं ।
सीमा पे लड़ने वाले सैनिकों का,
जो हमें किसी भी खौफ से महफूज रखता है ।
इन सभी हस्तियों के आगे मैं नत हूँ ।
इन सभी की कर्ज दार हूँ ।
भारत का भविष्य निर्माण करेंगे ।
उन बच्चियों का जो रूढ़िवादिता की,
भेंट चढ़ते चढ़ते बच गई हैं ।
भाग्य विधाता देश के सह्रदय नागरिकों का ,
जो समय समय पर देश का नासूर बना भ्रष्टाचार की
नकेल कसने को हर वक्त तैयार रहते हैं ।
उन कास्तकारों और मजदूरों का जो,
नींव की ईंट बन उफ़ तक नहीं करते हैं ।
शिक्षक जो अथाह ज्ञान देते हैं,
परन्तु उसका कोई हिसाब नहीं है ।
स्रष्टि में लाने वाले उन माता पिता का ,
जिनके किसी भी कार्य की कीमत नहीं चुकाई जा सकती ।
सहकारिता का सबक सिखाने वाले भाई बहिन और दोस्तोंका,
जो ज्यादा ज्ञानवान न होकर भी बहुत कुछ देदेते हैं।
सभी प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष सहयोग देने वाली हस्तियों का,
जो हमें तनाव रहित रखने की कोशिश करतीं हैं ।
सीमा पे लड़ने वाले सैनिकों का,
जो हमें किसी भी खौफ से महफूज रखता है ।
इन सभी हस्तियों के आगे मैं नत हूँ ।
इन सभी की कर्ज दार हूँ ।
Monday, 19 August 2013
Tuesday, 13 August 2013
उत्तराखण्ड त्रासदी
उत्तराखंड भयंकर त्रासदी के
कोई उत्तरदायी क्यों न हुए।
कर- कर के वादे जनता से
वादियों में तुम कहाँ गुम है हुए ।
तसल्ली दे के सुशासन के
शवासन में तुम लीन हो गए ।
जनता की चीख पुकारों को
सम्मान के शोर में भूल ही गए ।
उत्तराखंड भयंकर त्रासदी के
कोई उत्तरदायी क्यों न हुए ।
लापता की गिनती,तुमने की ही नहीं
जाने वालों की गणना सही तो करो ।
कितने खोए कितने पाए
उनका तुम कोई हिसाब करो।
कब तक वो पहुंचेंगे घर हैं
उनका तुम सब जबाब तो दो।
दे- दे आश्वासन मुआवजे के
लवाजमे में तुम चले ही गए ।
उत्तराखण्ड भयंकर त्रासदी के
कोई उत्तरदायी क्यों न हुए ।
कोई उत्तरदायी क्यों न हुए।
कर- कर के वादे जनता से
वादियों में तुम कहाँ गुम है हुए ।
तसल्ली दे के सुशासन के
शवासन में तुम लीन हो गए ।
जनता की चीख पुकारों को
सम्मान के शोर में भूल ही गए ।
उत्तराखंड भयंकर त्रासदी के
कोई उत्तरदायी क्यों न हुए ।
लापता की गिनती,तुमने की ही नहीं
जाने वालों की गणना सही तो करो ।
कितने खोए कितने पाए
उनका तुम कोई हिसाब करो।
कब तक वो पहुंचेंगे घर हैं
उनका तुम सब जबाब तो दो।
दे- दे आश्वासन मुआवजे के
लवाजमे में तुम चले ही गए ।
उत्तराखण्ड भयंकर त्रासदी के
कोई उत्तरदायी क्यों न हुए ।
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